कोरबा में धर्मयुद्ध: “जब तक जिएंगे, हिंदुओं को कटने-बंटने नहीं देंगे”, धीरेंद्र शास्त्री के दिव्य दरबार में 583 की ‘घर वापसी’
"धर्मांतरण के ठेकेदारों की अब खैर नहीं: कोरबा में 583 की घर वापसी और शास्त्री जी की खुली चुनौती!"

कोरबा, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ की न्यायधानी के समीप कोरबा के ढपढप में चल रही 5 दिवसीय हनुमंत कथा के चौथे दिन एक ऐसा इतिहास रचा गया, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हुंकार के बीच 583 लोगों ने सनातन धर्म में घर वापसी की। इसमें एक पूरा मुस्लिम परिवार भी शामिल है, जिन्होंने मजहब की दीवारें तोड़कर अपनी मूल जड़ों को चुना।
“हालेलुया वालों की ठठरी मारी जाएगी”: धीरेंद्र शास्त्री की खुली चेतावनी
कथा के मंच से धीरेंद्र शास्त्री का आक्रामक रूप देखने को मिला। उन्होंने धर्मांतरण कराने वाले गिरोहों और मिशनरियों को ललकारते हुए कहा:
“आसपास कई हालेलुया वाले (धर्मांतरण कराने वाले) सक्रिय हैं, उनकी अब ठठरी मारी जाएगी। अब छत्तीसगढ़ में यह खेल नहीं चलेगा। जब तक शरीर में प्राण हैं, हिंदुओं को न कटने देंगे, न बंटने देंगे और न मिटने देंगे।”
खुद को ‘छत्तीसगढ़ का भांचा’ बताते हुए शास्त्री जी ने कहा कि जो लोग राह भटक कर दूसरे मजहब में चले गए थे, उनकी घर वापसी का अभियान अब रुकने वाला नहीं है।
दिव्य दरबार: 2 लाख का जनसैलाब और ‘पर्चा’ से समाधान
चौथे दिन आयोजित दिव्य दरबार में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि कोरबा की सड़कें छोटी पड़ गईं।
- चमत्कारिक माहौल: मंत्रोच्चार शुरू होते ही दरबार में मौजूद सैकड़ों महिला-पुरुष झूमने लगे। दावा किया गया कि भूत-प्रेत बाधा से पीड़ित लोगों का शास्त्री जी ने अपनी शक्तियों से ‘इलाज’ किया।
- सटीक पर्चा: पंडित जी ने भक्तों की समस्याओं को बिना बताए कागज पर लिख दिया, जिसे देखकर लोग दंग रह गए।
583 लोगों का शुद्धिकरण: मुस्लिम परिवार की सनातन में वापसी
इस आयोजन का सबसे भावुक और गर्व भरा क्षण वह था जब 583 लोगों ने एक साथ ‘जय श्री राम’ का उद्घोष कर सनातन धर्म स्वीकार किया।
- पंडाल में जश्न: घर वापसी की घोषणा होते ही पूरे पंडाल में महिलाएं और पुरुष खुशी से नाचने लगे। यह दृश्य सनातन की विजय का प्रतीक बन गया।
- स्वैच्छिक वापसी: मुस्लिम परिवार समेत सभी लोगों ने स्वीकार किया कि वे लालच या भ्रम में आकर हिंदू धर्म छोड़ चुके थे, लेकिन अब वे सनातनी गौरव के साथ जीना चाहते हैं।
मानवता का संदेश: बुजुर्ग को मंच पर दी 1.20 लाख की मदद
धीरेंद्र शास्त्री ने न केवल धर्म की रक्षा की बात की, बल्कि मानवता का उदाहरण भी पेश किया।
- पाली मुनगाडीह के एक अत्यंत गरीब बुजुर्ग, जो सुबह से पैदल चलकर दरबार पहुंचे थे, उनकी व्यथा सुन शास्त्री जी का हृदय भर आया।
- उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “लोग नाचने वाली स्त्रियों पर पैसे लुटाते हैं, लेकिन जरूरतमंद की मदद नहीं करते।” * शास्त्री जी ने तुरंत अपनी ओर से 50 हजार रुपये दिए और वीआईपी यजमानों के सहयोग से कुल 1 लाख 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता बुजुर्ग को प्रदान की। साथ ही अपनी टीम की गाड़ी से उन्हें सुरक्षित घर भिजवाया।
राष्ट्रवादी न्यूज़ विश्लेषण: क्यों जरूरी है यह आक्रामक रुख?
कोरबा की इस कथा ने सिद्ध कर दिया है कि छत्तीसगढ़ में अब सनातन की लहर चल पड़ी है।
- हिंदू गौरव: धीरेंद्र शास्त्री का “कटने-बंटने नहीं देंगे” वाला बयान हिंदुओं को एकजुट करने का मंत्र बन गया है।
- धर्मांतरण पर प्रहार: सीधे तौर पर मिशनरियों को चुनौती देकर उन्होंने छत्तीसगढ़ के आदिवासियों और भोले-भाले हिंदुओं को सुरक्षा का अहसास कराया है।
निष्कर्ष:
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की यह कथा केवल धार्मिक प्रवचन नहीं, बल्कि हिंदू पुनर्जागरण का शंखनाद है। 583 लोगों की घर वापसी और धर्मांतरण गिरोहों को दी गई चेतावनी यह बताने के लिए काफी है कि अब सनातन धर्म की रक्षा के लिए ‘भांचा’ मैदान में उतर चुका है।
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