महतारी वंदन योजना: ई-केवाईसी में ‘आधार मिसमैच’ ने बढ़ाई रार, प्रिंटआउट के चक्कर में पिस रहे CSC संचालक

न्यूजडेस्क राष्ट्रवादी न्यूज छत्तीसगढ़: प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना के तहत ई-केवाईसी की प्रक्रिया इन दिनों सीएससी (Common Service Center) संचालकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और हितग्राहियों के बीच विवाद का केंद्र बन गई है। एक ओर सरकार ने इस सेवा को पूर्णतः निःशुल्क घोषित किया है, वहीं दूसरी ओर तकनीकी खामियों और विरोधाभासी निर्देशों ने ‘ग्राउंड जीरो’ पर भारी अफरा-तफरी मचा दी है।
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
वर्तमान में बड़ी संख्या में ऐसे हितग्राही सामने आ रहे हैं जिनका आधार डेटा सिस्टम से मिसमैच (Mismatch) हो रहा है। ऐसे मामलों में:
- आंगनवाड़ी व महिला बाल विकास विभाग की ओर से हितग्राहियों से एक अलग फॉर्म और सिस्टम में दिख रहे एरर (Error) का प्रिंटआउट मांगा जा रहा है।
- दूसरी ओर, सीएससी जिला प्रबंधकों (District Managers) का सख्त निर्देश है कि संचालकों को किसी भी स्थिति में प्रिंटआउट नहीं देना है।
सैंडविच बने सीएससी संचालक, फूट रहा जनता का गुस्सा
सीएससी संचालकों का कहना है कि जब वे प्रिंट देने से मना करते हैं, तो जनता का गुस्सा उन पर फूटता है। लोग आरोप लगा रहे हैं कि संचालक जानबूझकर काम में देरी कर रहे हैं।
डिस्ट्रिक्ट मैनेजरों का तर्क:
प्रबंधन का मानना है कि यदि संचालक प्रिंटआउट के नाम पर 2 या 5 रुपये भी लेते हैं, तो सरकार की ‘निःशुल्क सेवा’ वाली छवि धूमिल होगी और यह संदेश जाएगा कि केवाईसी के पैसे लिए जा रहे हैं। इसी डर से प्रिंटआउट देने पर पाबंदी लगाई गई है।
ऊंट के मुंह में जीरा: मात्र ₹15 का मानदेय
सीएससी (CSC) संचालकों का कहना है कि इस पूरी जटिल प्रक्रिया के बदले उन्हें मात्र 15 रुपये दिए जा रहे हैं। आज के महंगाई के दौर में, जहां ऑपरेटर को हाई-स्पीड इंटरनेट, बिजली, दुकान का किराया और महंगे बायोमेट्रिक उपकरणों (आइरिस और मॉर्फो) का खर्च उठाना पड़ता है, वहां यह राशि ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ के समान है। संचालकों के मुताबिक, इतनी कम राशि में स्टेशनरी और मेहनत का खर्च निकालना भी नामुमकिन है।
बिना संसाधनों के ‘अतिरिक्त बोझ’
हाल ही में एक समाचार पत्र में छपी खबर स्पष्ट करती है कि ई-केवाईसी के लिए आवश्यक उपकरण जैसे लैपटॉप, हाई-स्पीड इंटरनेट, आइरिस स्कैनर और मॉर्फो डिवाइस के लिए सरकार ने कोई आर्थिक सहायता नहीं दी है। कई संचालकों ने कर्ज लेकर या गहने गिरवी रखकर ये मशीनें खरीदी हैं। अब सर्वर डाउन होने की समस्या और विभाग बनाम सीएससी के विरोधाभासी आदेशों ने उनकी कमर तोड़ दी है।
योजना के क्रियान्वयन पर उठते सवाल
- नीतिगत स्पष्टता का अभाव: जब सेवा मुफ्त है, तो आधार मिस मेच की रशीद एवं सुधार फॉर्म का खर्च एवं ऑपरेटरों के निवेश और स्टेशनरी (कागज-स्याही) के खर्च मात्र 15 रु भरपाई हो पाएगी ?
- हितग्राही परेशान: सर्वर एरर के कारण महिलाएं चिलचिलाती धूप में कैंप स्थलो का चक्कर काट रही हैं।
- ऑपरेटरों का मानसिक दबाव: एक तरफ समय सीमा (30 जून 2026) का दबाव है, तो दूसरी तरफ जनता और विभाग के बीच तालमेल की कमी।
निष्कर्ष:
यदि शासन और प्रशासन ने जल्द ही आधार मिसमैच की समस्या और प्रिंटआउट से जुड़े निर्देशों पर स्पष्टता नहीं दिखाई, तो महतारी वंदन योजना का यह महत्वपूर्ण चरण विवादों की भेंट चढ़ सकता है। फिलहाल, सीएससी संचालक सरकार और जनता के बीच ‘पिसाई’ का पात्र बन गए हैं।



