बैंकिंग समावेशन में बड़ा बदलाव: RBI ने बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (BC) ढांचे के लिए पेश किया नया संरचित मॉडल; वेतन संरचना और निगरानी होगी सख्त

बिजनेस फैसिलिटेटर (BF) मॉडल सितंबर 2026 तक होगा बंद; बीसी एजेंटों को मिलेगा ‘फिक्स्ड प्लस वेरिएबल’ वेतन का लाभ और सुरक्षा।
विशेष समाचार ब्यूरो मुंबई, 1 जुलाई 2026 – भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने देश के अंतिम छोर तक बैंकिंग सेवाओं को औपचारिक, पारदर्शी और मजबूत बनाने के उद्देश्य से बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (BC) ढांचे में व्यापक बदलावों का एक ऐतिहासिक मसौदा प्रस्ताव जारी किया है। 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी होने वाले इन नए दिशानिर्देशों के तहत, केंद्रीय बैंक ने परिभाषित आउटलेट प्रारूपों, मानकीकृत पारिश्रमिक (वेतन) संरचना और अधिक सख्त शासन मानदंडों के साथ एक नया संरचित परिचालन मॉडल पेश किया है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और बैंकिंग से वंचित क्षेत्रों में जोखिम प्रबंधन को मजबूत करना और ग्राहक संरक्षण को उच्चतम स्तर पर ले जाना है।

1. दो-स्तरीय नई बीसी (BC) संरचना का अनावरण
नए प्रस्ताव के तहत, रिज़र्व बैंक ने मौजूदा बीसी नेटवर्क को अधिक जवाबदेह और सुव्यवस्थित बनाने के लिए दो विशिष्ट श्रेणियों में वर्गीकृत करने का निर्णय लिया है:
- बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट – बैंकिंग आउटलेट्स (BC-BO): इन्हें निश्चित सेवा वितरण इकाइयों (Fixed-Point Outlets) के रूप में स्थापित किया जाएगा। इनके लिए न्यूनतम परिचालन घंटे तय किए गए हैं, जिसके तहत इन्हें प्रतिदिन कम से कम 4 घंटे और सप्ताह में 5 दिन संचालित होना अनिवार्य होगा। ये आउटलेट किसी एक बैंक के लिए समर्पित रूप से बैंकिंग सेवाओं का न्यूनतम सेट प्रदान करेंगे। वित्तीय समावेशन के मूल्यांकन के लिए इन्हें पूर्ण ‘बैंकिंग आउटलेट’ के रूप में गिना जाएगा।
- बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट – बैंकिंग टचपॉइंट्स (BC-BT): ये लचीले समय वाले सेवा वितरण केंद्र होंगे। यह मुख्य रूप से बैंकों द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर सीमित अंतरसंचालनीय सेवाएं जैसे छोटे मूल्य के नकद लेनदेन और धन प्रेषण (रेमिटेंस) का काम संभालेंगे।
बिजनेस फैसिलिटेटर (BF) मॉडल की समाप्ति: आरबीआई ने अपनी नई नीति में बिजनेस फैसिलिटेटर की अलग श्रेणी को पूरी तरह समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है। वर्तमान में कार्यरत सभी बिजनेस फैसिलिटेटरों को निर्धारित नियमों और शर्तों को पूरा करते हुए 30 सितंबर, 2026 तक अनिवार्य रूप से BC-BO या BC-BT मॉडल में परिवर्तित (माइग्रेट) होना होगा।
2. पारिश्रमिक (वेतन) संरचना का मानकीकरण
बीसी एजेंटों की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने और उन्हें अनुचित शोषण से बचाने के लिए पारिश्रमिक ढांचे को औपचारिक रूप दिया गया है:
- BC-BO (बैंकिंग आउटलेट): इन्हें निश्चित (Fixed) + परिवर्तनीय (Variable) पारिश्रमिक के संयोजन के माध्यम से भुगतान किया जाएगा। निश्चित घटक का निर्धारण ‘भारतीय बैंक संघ’ (IBA) के अंतर्गत एक विशेष तंत्र के माध्यम से होगा, जिससे उन्हें एक तय मासिक आय की सुरक्षा मिलेगी।
- BC-BT (बैंकिंग टचपॉइंट): इन्हें केवल परिवर्तनीय (Variable) पारिश्रमिक प्राप्त होगा, जो उनके द्वारा किए गए लेनदेन पर निर्भर करेगा।
परिवर्तनीय वेतन का नया पैमाना: मसौदे के अनुसार, अब परिवर्तनीय पारिश्रमिक का निर्धारण केवल लेनदेन की मात्रा (वॉल्यूम) के आधार पर नहीं होगा, बल्कि इसमें ‘ग्राहक संतुष्टि’ जैसे महत्वपूर्ण गुणात्मक मापदंडों को भी जोड़ा जाएगा।
3. विस्तारित कार्यक्षेत्र और अनुमत गतिविधियाँ
नए वर्गीकरण के आधार पर दोनों श्रेणियों के बीसी के लिए गतिविधियों का दायरा स्पष्ट रूप से विभाजित किया गया है:
- BC-BO के लिए व्यापक अधिकार: इन्हें सामान्य बैंकिंग सेवाओं के अंतर्गत आने वाली विस्तृत गतिविधियों को संचालित करने की अनुमति होगी, जैसे— नया खाता खोलना, नकद जमा और निकासी, फंड ट्रांसफर, डेबिट कार्ड और चेक से संबंधित सेवाएं, आधार और मोबाइल सीडिंग, केवाईसी (KYC) अपडेट, उपयोगिता बिलों का भुगतान, शिकायत निवारण, लघु ऋण (Small Loans) वितरण, ऋण स्वीकृति के बाद की निगरानी और वसूली, तथा सूक्ष्म बीमा, म्यूचुअल फंड और पेंशन उत्पादों की बिक्री।
- BC-BT के लिए सीमित सेवाएं: ये आउटलेट्स केवल छोटे मूल्य के नकद लेनदेन और प्रेषण (Remittance) जैसी सीमित सेवाओं तक ही सीमित रहेंगे।
4. कड़े शासन, जोखिम प्रबंधन और परिचालन मानदंड
आरबीआई ने बीसी के कामकाज पर निगरानी को और कड़ा करने के लिए निम्नलिखित सुरक्षात्मक उपाय लागू किए हैं:
- बोर्ड स्तर की समीक्षा: बैंकों को बीसी की नियुक्ति के लिए बोर्ड से मंजूर नीतियां बनानी होंगी और हर छह महीने में बीसी संचालन की विस्तृत समीक्षा करनी होगी।
- गहन जांच-पड़ताल (Due Diligence): बैंकों को बीसी की नियुक्ति से पहले उनकी बाजार में प्रतिष्ठा, वित्तीय सुदृढ़ता, नकदी प्रबंधन क्षमता और तकनीकी योग्यता की कड़ी जांच करनी होगी।
- रीयल-टाइम तकनीक: सभी बीसी लेनदेन अनिवार्य रूप से बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम (CBS) से सीधे एकीकृत तकनीक के माध्यम से रीयल-टाइम आधार पर होने चाहिए और तुरंत इसकी पुष्टि ग्राहकों को दी जानी चाहिए।
- नकदी और खाता प्रबंधन: बैंकों को बीसी के लिए नकदी रखने की सीमाएं तय करनी होंगी और नकदी परिवहन के लिए बीमा सुनिश्चित करना होगा। धन के मिश्रण (Mixing of Funds) से बचने के लिए सभी बीसी लेनदेन निर्दिष्ट खातों (Designated Accounts) के माध्यम से ही रूट किए जाएंगे।
- निष्क्रियता (Inactivity) का पैमाना: यदि कोई BC-BO निरंतर 60 दिनों तक कोई भी लेनदेन नहीं करता है, तो उसे ‘निष्क्रिय’ मान लिया जाएगा और इसकी रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा।
5. ग्राहक संरक्षण, अनिवार्य प्रशिक्षण और प्रमाणन
अंतिम छोर के उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं:
- अनिवार्य प्रमाणन (Certification): BC-BO संचालित करने वाले व्यक्तियों के लिए ‘उन्नत प्रमाणन’ (Advanced Certification) प्राप्त करना अनिवार्य होगा। जबकि BC-BT संचालित करने वालों को काम शुरू करने के 9 महीने के भीतर ‘बुनियादी प्रमाणन’ या प्रशिक्षण पूरा करना होगा।
- उपभोक्ता अधिकार: सभी आउटलेट्स पर बैंक और बीसी के विवरण का पारदर्शी खुलासा करना अनिवार्य होगा। बैंकिंग सेवाओं को किसी अन्य तीसरे उत्पाद के साथ जबरन जोड़ने (Force-bundling) पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
- बैंकों की सीधी जवाबदेही: बीसी और उनके उप-एजेंटों द्वारा किए गए किसी भी कार्य या त्रुटि के लिए सीधे तौर पर संबंधित बैंकों को जिम्मेदार ठहराया गया है। इसमें एक मजबूत शिकायत निवारण तंत्र और बिजनेस निरंतरता (Business Continuity) योजना को भी अनिवार्य बनाया गया है।
यह मसौदा बैंकिंग समावेशन को एक संगठित उद्योग का रूप देने और देश के सुदूर क्षेत्रों में डिजिटल और वित्तीय साक्षरता को सुरक्षित तरीके से बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगा।




BC KI STHITI ATYADIK KHARAB HAI GOVT KO USPAR DHYAN DENA CHAHIYE, SERVICE CHARGE KE NAME PAR JO RASHI KATI JATI HAI USE FIX OR NEUNTAM KARNA CHAHIYE TABHI BC SUCHARU RUP SE KARY KAR PAYENGE..
For years, CSP (BC) operators have been exploited by their subsidiary companies. Despite being forced to perform various other tasks, including social security, they have siphoned off nearly half of the hard-earned money from bank friends.