बलरामपुर शिक्षा विभाग में ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’: बिना गलती के शिक्षक को किया सस्पेंड, कारण बताओ नोटिस किसी और के नाम, DEO कार्यालय की बड़ी लापरवाही उजागर !!

बलरामपुर-रामानुजगंज । छत्तीसगढ़ का बलरामपुर शिक्षा विभाग इन दिनों अपनी अजीबोगरीब कार्यप्रणाली और तानाशाही रवैये को लेकर सुर्खियों में है। ताजा मामला जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय की एक ऐसी घोर लापरवाही का है, जिसने विभाग की प्रशासनिक समझ और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक नव-नियुक्त सहायक शिक्षक को विभाग ने बिना उसका पक्ष सुने और बिना किसी ठोस गलती के सस्पेंड कर दिया, और अब पिछले 80 दिनों से वह न्याय के लिए भटक रहा है।
हैरानी की बात यह है कि विभाग ने जिसे सस्पेंड किया, उसके नाम पर कारण बताओ नोटिस तक जारी नहीं किया गया। मामले में वर्तमान डीओ की भूमिका और विभागीय सुस्ती को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।
क्या है पूरा मामला?
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गैना में पदस्थ नव-नियुक्त सहायक शिक्षक (विज्ञान प्रयोगशाला) खितेश कुमार पटेल को DEO कार्यालय द्वारा बीती 16 मार्च 2026 को एक आदेश जारी कर निलंबित कर दिया गया था। निलंबन की वजह यह बताई गई कि 26 फरवरी को निरीक्षण के दौरान शिक्षक शाला से दो दिन (25 और 26 फरवरी) अनुपस्थित थे। लेकिन इस निलंबन के पीछे की जो इनसाइड स्टोरी सामने आई है, वह विभाग के ढर्रे को बेनकाब करती है।
- छुट्टी का आवेदन था, लेकिन ‘ऑनलाइन’ नहीं कर पाया विभाग
पीड़ित शिक्षक ने बताया कि वे एक नव-नियुक्त कर्मचारी हैं। अनिवार्य शैक्षणिक कारणों से उन्हें महाविद्यालय जाना था, जिसके लिए उन्होंने बकायदा अपने संस्था प्रमुख (प्राचार्य) को लिखित आवेदन दिया था, जिसे प्राचार्य ने अग्रेषित (Forward) भी किया था। विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) वाड्रफनगर कार्यालय की सुस्ती का आलम यह है कि ऑनलाइन अवकाश पोर्टल पर शिक्षक का रजिस्ट्रेशन आज तक नहीं किया गया, जिसके कारण मजबूरन उन्हें लिखित आवेदन देना पड़ा। संस्था प्रमुख के स्तर पर हाजिरी पंजी में प्रविष्टि न होना एक लिपिकीय त्रुटि थी, जिसकी सजा शिक्षक को दे दी गई।
- DEO कार्यालय का ‘ब्लंडर’: नोटिस खितेश को, नाम दिनेश का!
शिक्षा विभाग की लापरवाही यहीं खत्म नहीं होती। निरीक्षण के बाद विभाग ने जो ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया, वह खितेश कुमार पटेल के नाम पर था ही नहीं! विभाग ने वह नोटिस किसी अन्य व्याख्याता ‘श्री दिनेश पटेल’ के नाम पर जारी कर दिया था। इसके बावजूद, शिक्षक खितेश कुमार ने प्रशासनिक शुचिता दिखाते हुए खुद उपस्थित होकर जवाब दिया। लेकिन डीओ कार्यालय ने अपनी गलती सुधारने के बजाय, बिना सोचे-समझे सीधे निलंबन का डंडा चला दिया।

- जवाब दिए 45 दिन बीते, 80 दिनों से लटका है निलंबन; डीओ मौन
निलंबन के बाद विभाग ने जो आरोप पत्र जारी किया, उसका बिंदुवार और स्पष्ट जवाब शिक्षक खितेश कुमार द्वारा 22 अप्रैल 2026 को ही DEO कार्यालय में जमा कराया जा चुका है। नियमतः इस पर तत्काल समीक्षा कर फैसला लिया जाना चाहिए था। लेकिन आज जवाब प्रस्तुत किए 45 दिनों से अधिक का समय बीत चुका है और निलंबन को लगभग 80 दिन हो रहे हैं, मगर डीओ कार्यालय कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। बहाली या आगामी कार्रवाई को लेकर फाइलें दबाकर रख दी गई हैं, जिससे पीड़ित शिक्षक भारी मानसिक प्रताड़ना से गुजर रहा है।

कलेक्टर की चौखट पर पहुंचा मामला
विभाग और डीओ कार्यालय की इस प्रताड़ना और तानाशाही से तंग आकर अब पीड़ित शिक्षक ने सीधे माननीय कलेक्टर महोदय (जिला- बलरामपुर, रामानुजगंज) की शरण ली है। 8 जून 2026 को सौंपे गए आवेदन में शिक्षक ने सारे दस्तावेजी सबूत (प्राचार्य द्वारा अग्रेषित अवकाश पत्र, गलत नाम वाला नोटिस और जवाब की पावती) संलग्न करते हुए मांग की है कि इस त्रुटिपूर्ण निलंबन को तत्काल समाप्त कर उन्हें ससम्मान सेवा में बहाल किया जाए।
माननीय कलेक्टर महोदय (जिला- बलरामपुर, रामानुजगंज) सौंपे गए आवेदन यहाँ से डाऊनलोड कर के पढ़े
जनता और बुद्धिजीवियों के सवाल:
- जब शिक्षक ने एडवांस में छुट्टी का आवेदन दिया था और वह प्राचार्य द्वारा अग्रेषित था, तो उसे ‘अनाधिकृत अनुपस्थिति’ मानकर सस्पेंड क्यों किया गया?
- दूसरे के नाम पर कारण बताओ नोटिस जारी करने वाले बाबू और अधिकारी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- आरोप पत्र का जवाब मिलने के 45 दिन बाद भी डीओ कार्यालय ने इस पर कोई फैसला क्यों नहीं लिया? क्या जानबूझकर कर्मचारियों को प्रताड़ित करना इस विभाग का शगल बन चुका है?
अब देखना यह होगा कि इस गंभीर मामले में बलरामपुर कलेक्टर क्या कड़ा एक्शन लेते हैं और बेलगाम हो चुके शिक्षा विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हैं या नहीं।
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