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पिथौरा में शराब दुकान ‘ड्राई’, लेकिन होटल-ढाबों में छलक रहे जाम; दो गुने दामों पर मिल रही शराब

पिथोरा। स्थानीय सरकारी शराब दुकान में पिछले कुछ दिनों से शराब का टोटा पड़ा हुआ है। दुकान के काउंटर पर ‘स्टॉक खत्म’ का बोर्ड लटकने से मदिराप्रेमियों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि जहां एक तरफ सरकारी दुकान पूरी तरह ‘ड्राई’ हो चुकी है, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्र के होटल और ढाबों में शराब की नदियां बह रही हैं। बस फर्क सिर्फ इतना है कि यहां शौकीनों को अपनी जेब दोगुनी ढीली करनी पड़ रही है।

सरकारी दुकान बंद, अवैध कारोबार बुलंद

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पिथौरा की मुख्य शराब दुकान में पसंदीदा ब्रांड तो दूर, सामान्य शराब भी उपलब्ध नहीं है। इसका सीधा फायदा क्षेत्र के अवैध शराब तस्करों और ढाबा संचालकों को मिल रहा है। सरकारी दुकान बंद होते ही इन ठिकानों पर पैर रखने की जगह नहीं बच रही है।

कैसे चल रहा है खेल?

दोगुने दाम पर बिक्री: जो पौवा या बोतल सरकारी दुकान में तय कीमत पर मिलती थी, वही होटल-ढाबों में ₹100 से ₹200 तक के अतिरिक्त प्रीमियम (महंगे दामों) पर बेची जा रही है।

देर रात तक महफिलें: नियमों को ताक पर रखकर पिथौरा और आस-पास स्थित ढाबों में देर रात तक शराब परोसी जा रही है।

अवैध स्टॉक का शक: सवाल यह उठ रहा है कि जब मुख्य दुकान में ही स्टॉक नहीं है, तो इन ढाबा संचालकों के पास इतनी भारी मात्रा में शराब कहां से आ रही है? आशंका जताई जा रही है कि दुकान के ड्राई होने से पहले ही बड़ी मात्रा में स्टॉक डंप कर लिया गया था।

सुलगते सवाल और डरी जनता

इस पूरे खेल से न सिर्फ आम जनता परेशान है, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। ढाबों में शराब पीने के बाद आए दिन होने वाले विवादों से स्थानीय लोग, खासकर महिलाएं और राहगीर खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है: “दुकान में शराब नहीं है तो यह अच्छी बात है, लेकिन ढाबों में जो अवैध अहाते चल रहे हैं, उससे पिथोरा का माहौल खराब हो रहा है। प्रशासन को इस पर तुरंत एक्शन लेना चाहिए।”

अब देखना यह होगा कि आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस इस खुलेआम चल रहे अवैध और महंगे खेल पर कब तक शिकंजा कसती है, या फिर होटल-ढाबों में यूं ही ‘महंगी’ महफिलें सजती रहेंगी।

AVINASH MITTAL

अविनाश मित्तल एक अनुभवी स्वतंत्र पत्रकार (Independent Journalist) हैं, जो सामाजिक, स्थानीय और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय रूप से लेखन और रिपोर्टिंग करते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सक्रियता के साथ-साथ ये सामाजिक गतिविधियों में भी रुचि रखते हैं और क्षेत्रीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं।

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