पत्थलगांव – किलकिला मार्ग बना ‘कीचड़ का टापू’ ; रास्तों में गड्ढे नहीं , गड्ढों में ढूंढना पड़ रहा रास्ता !! “जरा धीरे चलिए… वरना कीचड़ स्नान तय है !!” सड़क न हुई , धान का खेत हो गई ; केवल 20% काम करके ठेकेदार हुआ गायब , जनता त्रस्त , प्रशासन मस्त

पत्थलगांव । विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलती एक खौफनाक तस्वीर पत्थलगांव से किलकिला जाने वाले मुख्य मार्ग से सामने आ रही है । इस सड़क की हालत इतनी जर्जर और बदहाल हो चुकी है कि यहाँ से गुजरने वाले राहगीरों के मुंह से सिर्फ एक ही बात निकलती है— “अब रास्तों में गड्ढे नहीं बचे , बल्कि विशालकाय गड्ढों के बीच कहीं-कहीं रास्ता ढूंढना पड़ रहा है ।
“मानसून की शुरुआत होते ही करोड़ों की लागत से बनने वाली यह सड़क अब पूरी तरह से ‘खेती करने के अनुकूल‘ हो चुकी है । सड़क पर चारों तरफ पसरा दलदल और पानी से लबालब भरे गहरे गड्ढे देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रशासन ने यहाँ सड़क नहीं , बल्कि धान की रोपाई के लिए खेत तैयार करवाया हो ।
📌 लापरवाही की पराकाष्ठा
बारिश से पहले उखाड़ दी गड्ढे-भरी सड़कइस पूरे मामले में सबसे हैरान और आक्रोशित करने वाली बात यह है कि निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों ने बिना किसी ठोस कार्ययोजना के, बारिश का मौसम शुरू होने से ठीक पहले पुरानी बनी-बनाई डामर सड़क को उखाड़ फेंका।जनता की मांग थी कि बारिश से पहले इस मार्ग का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर पूरा किया जाए , लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब तक महज 20% रोड का ही निर्माण हो पाया है। ठेकेदार आधी-अधूरी सड़क को खोदकर और जनता को इस नारकीय दलदल में धकेलकर गायब है।
📸 तस्वीरें बयां कर रही हैं खौफनाक मंजर
सड़क से आ रही तस्वीरें प्रशासन के गाल पर करारा तमाचा हैं :

तालाब बनी सड़क : बड़ी-बड़ी गाड़ियां और कारें बीच सड़क पर बने गहरे और चौड़े जलभराव में डूबकर हिचकोले खा रही हैं। वाहनों के इंजन बंद होने और दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा हर पल बना रहता है।

फिसलती जिंदगी : मोटरसाइकिल सवार और राहगीर जान हथेली पर रखकर इस कीचड़ से पार पाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। ज़रा सी चूक होते ही लोग कीचड़ में गिरकर चोटिल हो रहे हैं।

थमा आवागमन : ट्रैक्टर जैसे बड़े वाहनों को भी इस मार्ग से गुजरने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। स्कूली बच्चों, मरीजों को ले जाने वाली एम्बुलेंस और दैनिक कामगारों के लिए यह सफर किसी दुःस्वप्न जैसा हो गया है।
⚠️ प्रशासन से सीधे और तीखे सवाल :
- क्या लोक निर्माण विभाग (PWD) और जिला प्रशासन किसी बड़े और घातक हादसे का इंतजार कर रहे हैं?
- बारिश से पहले सड़क को उखाड़कर अधर में छोड़ने वाले लापरवाह ठेकेदार पर अब तक जुर्माना या ब्लैकलिस्ट की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- मात्र 20% काम करके जनता को इस दलदल में लावारिस छोड़ देने की जवाबदेही किसकी है?
हमारी मांग : क्षेत्र की त्रस्त जनता शासन-प्रशासन से यह गुहार लगा रही है कि तत्काल प्रभाव से इस मार्ग पर मुरम/गिट्टी डलवाकर इसे चलने योग्य बनाया जाए और दोषी निर्माण एजेंसी पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए ।




