नक्सलवाद का ‘द एंड’: छत्तीसगढ़ में 31 मार्च की डेडलाइन पर ऐतिहासिक सफलता, 14 करोड़ का खजाना बरामद
31 मार्च की डेडलाइन पर बड़ा एक्शन: छत्तीसगढ़ में 34 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, 14 करोड़ की संपत्ति बरामद

रायपुर/बीजापुर: भारत सरकार द्वारा तय की गई 31 मार्च 2026 की डेडलाइन के साथ ही छत्तीसगढ़ के बस्तर से नक्सलवाद के खात्मे की सबसे बड़ी तस्वीर सामने आई है। सुरक्षाबलों को अब तक का सबसे बड़ा ‘नक्सली डंप’ (छिपाया हुआ माल) बरामद हुआ है, जिसकी कीमत 14 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। वहीं, दंतेवाड़ा जिले को आधिकारिक तौर पर ‘नक्सल मुक्त’ घोषित कर दिया गया है।
बड़ी कामयाबी: 7 किलो सोना और 3 करोड़ कैश बरामद
बीजापुर में 25 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया। इन सरेंडर करने वाले नक्सलियों से मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने जमीन में दबाकर रखा गया भारी खजाना बरामद किया:
- नकद राशि: 3 करोड़ रुपये कैश।
- सोना: 7 किलोग्राम शुद्ध सोना।
- कुल बरामदगी: इस डंप की कुल कीमत 14 करोड़ रुपये है।
- अब तक का रिकॉर्ड: 1 जनवरी 2024 से अब तक बीजापुर में कुल 19.43 करोड़ का डंप बरामद किया जा चुका है।
दंतेवाड़ा हुआ ‘नक्सल मुक्त’, 4 जिलों में 34 का
सरेंडरनक्सलवाद के खिलाफ चले “पूना मारगेम” (नई सुबह) अभियान का असर अब धरातल पर दिखने लगा है।
- दंतेवाड़ा: जिले के एसपी गौरव राय ने दावा किया है कि अब दंतेवाड़ा पूरी तरह नक्सलवाद से मुक्त है। यहाँ 5 बड़े नक्सलियों ने सरेंडर किया।
- बीजापुर: यहाँ सबसे ज्यादा 25 नक्सलियों ने हथियार डाले, जिनमें 12 महिला कैडर शामिल हैं। इन पर 1.47 करोड़ का इनाम था।
- सुकमा: 2 महिला नक्सलियों (8-8 लाख की इनामी) ने सरेंडर किया, जिनसे 5 लाख कैश और हथियार मिले।
- कांकेर: 2 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। यहाँ अब केवल 14 नक्सली सक्रिय बचे हैं, जिनसे संपर्क की कोशिश जारी है।
“बीजापुर में सरेंडर करने वाले 25 नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए भारत के संविधान की कॉपी सौंपी गई।”
खूंखार नक्सलियों ने डाले हथियार
सरेंडर करने वालों में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के कई बड़े नाम शामिल हैं, जो दशकों से दहशत का पर्याय थे:
- मंगल कोरसा (8 लाख इनामी): 12 बड़ी वारदातों में शामिल।
- शंकर मुचाकी (DVCM): 8 बड़े हमलों का मास्टरमाइंड।
- पाले कुरसम (ACM): 5 गंभीर घटनाओं में संलिप्त।
अमित शाह का संसद में ऐलान: “लक्ष्य हासिल हुआ”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 30 मार्च को लोकसभा में घोषणा की कि बस्तर से नक्सलवाद लगभग खत्म हो चुका है। सरकार ने 31 मार्च 2026 तक ‘नक्सल मुक्त भारत’ का जो लक्ष्य रखा था, सुरक्षाबलों ने उसे समय सीमा के भीतर पूरा कर दिखाया है।
विकास की नई बयार:
- हर गांव में स्कूल और राशन की दुकानें।
- तहसील स्तर पर स्वास्थ्य केंद्रों (PHC/CHC) का जाल।
- आधार कार्ड और सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ के जंगलों में अब गोलियों की गूंज की जगह शांति और विकास की चर्चा है। दंतेवाड़ा का नक्सल मुक्त होना और बीजापुर में 14 करोड़ के डंप की बरामदगी इस बात का प्रमाण है कि नक्सलियों की कमर पूरी तरह टूट चुकी है।




