नाग पंचमी 2026 : सोमवार के विशेष संयोग का धार्मिक महत्व — आचार्य ज्ञानेश महाराज ने दी महत्वपूर्ण जानकारी

पत्थलगांव। वर्ष 2026 की नाग पंचमी इस बार विशेष धार्मिक संयोग लेकर आ रही है। 17 अगस्त 2026, सोमवार को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। इसी दिन श्रावण मास का सोमवार होने के कारण नागदेवता की पूजा और भगवान शिव की आराधना का विशेष संयोग बन रहा है। इस अवसर के धार्मिक महत्व और पूजा-विधि के संबंध में आचार्य ज्ञानेश महाराज ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है।
🐍 तीन वर्ष बाद सोमवार को नाग पंचमी
आचार्य ज्ञानेश महाराज के अनुसार, वर्ष 2026 में नाग पंचमी श्रावण शुक्ल पंचमी को सोमवार के दिन पड़ रही है। इससे पहले वर्ष 2023 में भी नाग पंचमी सोमवार को थी। इस प्रकार तीन वर्ष के अंतराल के बाद सोमवार को नाग पंचमी का विशेष संयोग बना है।
पंचमी तिथि 16 अगस्त की शाम लगभग 4:52 बजे से प्रारंभ होकर 17 अगस्त की शाम लगभग 5 बजे तक रहने की जानकारी दी गई है। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर संभव है।

🔱 नाग पंचमी और भगवान शिव का विशेष संबंध
आचार्य ज्ञानेश महाराज बताते हैं कि सनातन परंपरा में नागदेवता की पूजा का विशेष महत्व है। भगवान शिव के गले में नागराज का विराजमान होना भी नागदेवता और शिव आराधना के आध्यात्मिक संबंध को दर्शाता है।
नाग पंचमी पर अनंत, वासुकि, शेष, पद्म, कंबल, कर्कोटक, अश्वतर, धृतराष्ट्र, शंखपाल, तक्षक और कालिय आदि नागों का स्मरण करने की परंपरा है।
🙏 नाग पंचमी पर करें नागदेवता का स्मरण
इस दिन श्रद्धापूर्वक नागदेवता का स्मरण करते हुए प्रचलित नाग स्तोत्र का पाठ किया जा सकता है—
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शङ्खपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥
आचार्य ज्ञानेश महाराज के अनुसार श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य और परंपरा के अनुसार नागदेवता का पूजन एवं मंत्र-जप कर सकते हैं।
ॐ नागदेवताभ्यो नमः।
ॐ अनन्ताय नमः।
ॐ वासुकये नमः।
ॐ शेषाय नमः।
ॐ तक्षकाय नमः।
🔱 सोमवार होने से बढ़ा शिव आराधना का महत्व
सोमवार भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और नाग भगवान शिव के प्रमुख आभूषणों में से एक हैं। ऐसे में नाग पंचमी और सोमवार का एक साथ पड़ना धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है।
आचार्य ज्ञानेश महाराज ने श्रद्धालुओं से इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक, शिव पूजन, महामृत्युंजय मंत्र का जप तथा अपनी श्रद्धा के अनुसार रुद्राभिषेक करने की बात कही है।
भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जप भी किया जा सकता है।
🌿 पूजा के साथ प्रकृति और जीवों के प्रति करुणा का संदेश
नाग पंचमी केवल धार्मिक अनुष्ठान का पर्व ही नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति करुणा एवं संरक्षण का संदेश भी देता है। आचार्य ज्ञानेश महाराज ने बताया कि नागदेवता की पूजा के माध्यम से सनातन परंपरा में जीव-जगत के प्रति सम्मान और सह-अस्तित्व की भावना को भी महत्व दिया गया है।
परंपरागत मान्यताओं के अनुसार नागदेवता की पूजा से सर्पभय से रक्षा, परिवार की सुख-शांति और मंगल की कामना की जाती है।
इस वर्ष 17 अगस्त को नाग पंचमी और श्रावण सोमवार का यह विशेष संयोग श्रद्धालुओं के लिए शिव एवं नागदेवता की आराधना का महत्वपूर्ण अवसर है।



